Sunday, April 28, 2013

जो अकेला छोड़ चली है...


और न जला इस दिल को ज़ालिम...
अब तो राख तक तड़प उठी है...
गम भी ग़मगीन हो चले हैं...
जो अकेला मुझे तू छोड़ चली है...

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