Thursday, September 19, 2013

Racism on TV??

Everyday we see commercials promoting fairness creams. It is ok for companies to promote their products, but now a days the commercials are increasingly becoming the racist kind. They are showing the so called less fairer group to be a less successful, sometimes hated or ignored kind of person. Is it so?? Tell me which fairness cream Netaji Subhash Chandra Bose used? or for that matter Dhirubhai Ambani used? or Obama or Nelson Mandela used? Aren't they successful?? Let's leave such high dignitaries and have a look around us. Are only the fairer people excelling or are the supposed less fairer people less successful?

Sunday, August 25, 2013

प्रेम या मिथ्या????

सावन की प्रथम फुहारें थी
या था अपना अल्हड़पन...
एक अखंड प्रेम की अनुभूति या
स्वप्न देश में था ये मन...
वो रीति प्रीति की पावन थी
या गुड्डे गुडियो का छल मात्र...
कुछ ज्ञात नहीं, कुछ याद नहीं,
दुविधा है ये क्या भीषण.....

अबोध ह्रदय ने संभवतः
रचा था ये काव्य अनाम प्रिये...
इसके प्रथम पृष्ठ पर अंकित
अब भी है तुम्हारा नाम प्रिये...
एकाकी चलते युग बीता,
गंतव्य दिखे अन्धकार मात्र...
इस दुस्वप्न की सुबह तुम ही हो,
तुम ही हो इसकी शाम प्रिये...

कब से यूँ रस्ता तकती ,
अब आखें भी पथरायी हैं...
सावन भी आ के बीत गया,
अब कलियाँ भी मुरझाई हैं...
बिछोह सहा ना जाता है,
अब आस भी टूटी जाती है...
जो अब तुम वापस ना आये तो
फिर सब मिथ्या है, परछाई है.......

Thursday, August 22, 2013

चलो एक नया आशियाँ बुनते हैं...

एक बंजारा था,
आवारा था,
निकल पड़ा एक अनजाने सफ़र पर
तन्हा मैं बेचारा था...
तुम आई, कुछ यूँ छाई,
दूर एक मंजिल सी नज़र आई...
अब दोनों साथ मिलकर
इस मोड़ से रास्ता एक नया चुनते हैं...
चलो एक नया आशियाँ बुनते हैं...

Monday, August 19, 2013

एक ख्वाब देखा था...

एक ख्वाब देखा था...
अश्कों का सैलाब देखा था...
जिस्म तो चंद लम्हों में डूब गया,
रूह को निकलने को बेताब देखा था...
क्या अच्छा, क्या बुरा...
जो हुआ, सो हुआ...
बीती बातें भूल कर
उम्मीदों की एक नयी दास्ताँ बुनते हैं...
चलो फिर एक नया आशियाँ बुनते हैं...

Wednesday, August 14, 2013

"प्याज का बदला"

नयी पिक्चर: "प्याज का बदला"

Tuesday, May 07, 2013

मेरा भारत महान

मेरा भारत महान:
- चीन को उनकी हद में रखने के लिए अपनी सेना की गतिविधि कम की
- अपने बंकर नष्ट किये
- हमारी जेलों में बंद कैदी, जिन्हें हम किसी न किसी जुर्म में मुजरिम करार देते हैं, हमारे नेताओं और जनता से ज्यादा देशभक्त निकले
- पड़ोसी देश घुसपैठ करता है, आतंक मचाता है, निर्दोषों की निर्मम हत्या करता है, तो हम उनके साथ क्रिकेट नहीं खेलते (बचपन की यादें)
- ४२ वर्ष का व्यक्ति युवा नेता कहलाता है
- यहाँ हर व्यक्ति को अपनी आय की जानकारी देनी होती है, सिवाय एक विशेष महिला के, जिसे लगता है की ऐसा करने से उसकी जान को खतरा पैदा हो सकता है
- यहाँ एक पूर्व प्रधानमंत्री अपने घुटनों का इलाज मुंबई में करा कर एक मिसाल कायम करते हैं, और एक पार्टी-विशिष्ट की नेत्री एक रहस्यमय बीमारी के इलाज के लिए अम्रीका जाती हैं, जिसकी कानो-कान खबर भी नहीं लगती
- देश के बड़े बड़े दिग्गज नेता कुत्तों की तरह दम हिलाते हुए एक ऐसे कल के छोरे के आगे-पीछे घूमते हैं जीको राजनीती की कोई समझ नहीं है (शर्मनाक)
- जहाँ सेना, पुलिस, और अन्य विशिष्ट दल सिर्फ "अति-विशिष्ट" व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए ही रह गए हैं
- जहाँ स्कूल, कॉलेज, अनुसंधान केंद्र तो कई हैं, पर वहां सिर्फ रोबोट तैयार किये जाते हैं
- जहाँ यदि आप उच्च जाति और निर्धन घर से हों, तो आपकी फरियाद कोई नहीं सुनने वाला
- जहाँ जातिवाद, धर्म, परिवारवाद सिर्फ और सिर्फ आम जनता में फूट डाल कर राज करने के लिए हमारे ही प्रतिनिधियों द्वारा प्रयोग किया जाता है

सच में... यह सूची बढती ही चली जाएगी... गर्व है ऐसे देश पर जहाँ हम सरकार तो कुछ सौ रुपयों, एक बोतल शराब, या अपनी जाती और धर्म के आधार पे चुन लेते हैं, और कहते हैं की सरकार निकम्मी है... वास्तव में हम निकम्मे हैं... सरकार तो हमारा प्रतिबिम्ब है...

Monday, April 29, 2013

Whom do we hate??

Life, for me, has taken a good turn in recent times. When I look back to my life history, I find many people I used to hate. The reasons vary from person to person. At this point of time, I feel quite confused as to why I hated those people? Most of the reasons sound so dumb now. May be I was an idiot or it was just my childhood, immaturity or may be it was not hate after all (kind of it is infatuation, not love 99.9999% of the time).

Sunday, April 28, 2013

जो अकेला छोड़ चली है...


और न जला इस दिल को ज़ालिम...
अब तो राख तक तड़प उठी है...
गम भी ग़मगीन हो चले हैं...
जो अकेला मुझे तू छोड़ चली है...

Monday, April 15, 2013

दिल हार बैठे...


ख्वाब में भी मिल जाते थे जब हसरत न थी...
जब दिल हार बैठे तो दीदार नहीं होता...

Thursday, April 11, 2013

कोई तुमसे सीखे...


मुस्कुरा के दिल दुखने की अदा कोई तुमसे सीखे...
पास आ के दूर जाने की अदा कोई तुमसे सीखे...
शहरों में कई मकान बनते हैं, टूट जाते हैं...
दिल में घर बनाकर लूट जाने की अदा कोई तुमसे सीखे...

Wednesday, April 10, 2013

जाने क्यूँ ...


तुम्हारे बिना ये दिल उदास है, जाने क्यूँ ...
अब भी इसे तुम्हारे लौटने की आस है, जाने क्यूँ ...
कुदरत ने मुझे तुमसे दूर तो कर दिया...
दिल अब भी, शायद, तुम्हारे पास है, जाने क्यूँ ........